चोदू चौकीदार की फ्री चुदाई स्टोरी

 
loading...

दोस्तो, यह कहानी मेरे एक मित्र ने मुझे बताई थी, जिस आदमी की कहानी है, मैं फिर निजी तौर पर उससे मिल कर भी आया क्योंकि जो मैंने सुना था उसे बिना देखे तो एतबार भी नहीं किया जा सकता था. मैंने सारा किस्सा उसके मुँह से सुना, उसको बताया कि मैं तुम्हारे इस तजुर्बे पे एक कहानी लिख कर नेट पे डालूँगा.
वो बोला- अरे साहब, ये भी कोई कहानी है, कौन पढ़ेगा इसे!
मैंने कहा- तुम इसकी चिंता मत करो, मुझे सब कुछ डीटेल में बताओ.

फिर उसने जो बताया, लीजिये आप कहानी पढ़िये और आप भी जान जाएंगे कि ये सारा माजरा क्या है. कहानी को मैं अपने तरीके से लिख रहा हूँ.

मेरा नाम जय प्रकाश है, हरियाणा का रहने वाला हूँ, एक छोटे से गाँव में रहता हूँ. पढ़ाई लिखाई में शुरू से ही कमजोर रहा हूँ इस लिए दसवीं भी पास नहीं कर पाया. सारा दिन गाँव के लड़कों के साथ घूमना फिरना… जब 20 का हो गया और खेती बाड़ी के काम में भी दिल न लगा तो मैंने घर में कह दिया कि मैं तो शहर जा कर कोई नौकरी कर लूँगा.
घर वालों के विरोध के बावजूद मैं पहले दिल्ली गया, मगर वहाँ मुझे कोई खास काम नहीं मिला, अब मेरे जैसे अनपढ़, अंगूठा छाप, जाट बुद्धि को क्या काम मिल सकता था.

 

मगर मेरे एक गाँव वाले ने मुझे गुड़गाँव के एक बहुत बड़ी सोसाइटी में चौकीदार की नौकरी के लिए सिफ़ारिश करवा कर मेरी नौकरी का जुगाड़ कर दिया.
जब मैं वहाँ पहुंचा तो देखा, 15 मंज़िली इमारत थी, पूरी बिल्डिंग में फ्लैट ही फ्लैट थे. मैं वहाँ पहुंचा तो मुझे वहाँ के एक मैनेजर ने सारा काम समझा दिया और मेरे को और आदमी से मिलवाया, वो भी वहाँ चौकीदार था. रामकृपा यादव उर्फ रामू काका, उम्र होगी कोई 50 बरस. वो वहाँ अकेले ही रहते थे, तो मुझे उन्होंने अपने ही क्वाटर में जगह दे दी. जगह क्या थी, बस एक छोटा सा कमरा, साथ में एक गुसलखाना, कमरे में ही एक तरफ छोटा सा रसोई का जुगाड़ सा कर रखा था. पहले एक बिस्तर लगा था, मेरे आने पे दो बिस्तर लगा लिए थे.

रात को हम दोनों की ड्यूटी होती थी, सुबह आकर हम अपने कमरे में सो जाते थे.

थोड़ी ही दिनों में मेरी और रामू काका की अच्छी दोस्ती हो गई. मैं उन्हें ताऊ कहता था.

एक दिन दोपहर को हम लोग अपने कमरे में ही बैठे थे, तभी वहाँ एक औरत आई. गीता रानी. वो वहाँ 2-4 फ्लैटस में झाड़ू पोंछा किया करती थी.
रामू काका बड़े खुश हो कर उससे मिले. बाद में पता चला, दोनों का आपस में टांका भिड़ा था. वैसे तो गीता रानी शादीशुदा थी, बच्चों वाली थी, मगर कभी कभी रामू काका के पास आ जाती थी, और दोनों को फ्री की चुदाई मिल जाती थी, दोनों की अपनी अपनी ठर्क मिट जाती थी.

उस दिन गीता आई तो रामू काका से मिल कर मेरी तरफ देख कर बोली- ये लड़का कौन है?
रामू काका ने कहा- अरे नया लड़का आया है, मेरे साथ ही काम करता है और यहीं पर ही रहता है.

खैर रामू काका और गीता ने मिल कर खाना बनाया, खाया हम तीनों ने, क्योंकि मुझे खाना पकाना नहीं आता था. खाना खा कर रामू काका ने मुझे कहा- अरे सुन तू तो नौजवान है, जा थोड़ी देर बाहर घूम आ!
मैं उनका इशारा समझ गया और बाहर आ गया.

रामू काका ने दरवाजा बंद कर लिया. मैं आ कर अपनी ड्यूटी रूम पर आ कर बैठ गया. कोई एक घंटे बाद मेरे मोबाइल पर रामू काका का फोन आया, तो मैं वापिस अपने क्वाटर में आ गया.
अंदर आया तो सारा क्वाटर गर्म हवा से भर पड़ा था. गीता अभी भी चादर ओढ़े बिस्तर पे लेटी थी.

मैंने आकर कमरे के दरवाजे खिड़कियाँ खोले तो कमरे में ताज़ी हवा आई और कमरे में ताज़गी आई.

मैंने देखा गीता मुझे बड़ा ध्यान से देख रही थी. फिर उसने रामू काका से कहा- ये लड़का क्या हमेशा तुम्हारे साथ ही रहेगा?
रामू काका ने कहा- हाँ, अब तो यहीं रहेगा.
फिर गीता बोली- तो फिर तो हमे पहले की तरह खुल्ला टाइम तो नहीं मिलेगा.

मैंने कहा- मुझे तो ताऊ ने फोन करके बुलाया था, आप कहो तो मैं चला जाता हूँ.
गीता ने अपने बदन पे ली हुई चादर उतारी और बड़ी बेशर्मी से कामुकता से भरी अदा से मेरे सामने ही अपना ब्लाउज़ पहनने लगी.

उस दिन मैंने पहली बार उसकी नंगी छाती देखी. रामू काका ने मुझे देखा और मुझे आँख मार कर मुस्कुरा दिये.
गीता चली गई.

बाद में रामू काका ने मुझे कहा- लगता है गीता तुझ पे रीझ गई है.
मैंने कहा- तो? वो तो थारी माशूक है.
रामू काका बोले- अरे घंटे की माशूक है, साली लंड की यार है, इसके खसम से कुछ बनता नहीं है, तो मेरे पास आ जाती है.
मैंने कहा- मगर वो तो मुझसे भी बहुत बड़ी है, मैं तो अभी 21 का हूँ, और ये तो 40 के आस पास होगी.

रामू काका बोले- देख बात सुन, अगर तो तू है लंगोट का पक्का फिर तो रहने दे. अगर ज़िंदगी का मज़ा लेना चाहता है, तो देख ले, जवान है, तगड़ा है. यहाँ शहर में कौन किस को जानता है, जिसकी फ्री चुदाई मिलती है, मार! बहनचोद एक से एक चुदक्कड़ रहती हैं इस सोसाईटी में… कम से कम 20 औरतों को तो मैं जानता हूँ जो अपने पति के अलावा और मर्दों से चुदवाती हैं. और लड़कियों की तो गिनती ही नहीं, इस सोसाईटी की कितनी लड़कियाँ यहाँ वहाँ मुँह मारती फिरती हैं.

मैंने कहा- ताऊ, लगा मुझे भी कई लड़कियों को देख कर लगा था, जैसे उनकी आँखों में कोई इशारा है. पर मैंने उनको कोई भाव नहीं दिया.
तो रामू काका हंस कर बोले- अरे तू तो बहुत ही शरीफ़ है. लगता है तेरा भी रिबन कटवाना पड़ेगा.
हम ऐसे ही हँसते बोलते बातें करते रहे.

अगले हफ्ते रामू काका ने मुझे कहा- आज रात को 12 बजे के बाद हम ड्यूटी से वापिस अपने क्वाटर में आ जाएंगे.
मैंने कहा- क्यों? और वो भी अपनी ड्यूटी छोड़ कर?
रामू काका बोले- अरे, यहाँ कौन देखता है. किसी को पता भी नहीं चलेगा, चुपचाप अपना काम करके वापिस आ जाएंगे.
मैंने पूछा- कौन सा काम?
रामू काका ने मेरा हाथ दबा कर कहा- आज तेरी रिबन कटाई करवानी है, आज तुझे भी घोड़ी पर चढ़ा देना है.
मैंने उनकी बात समझ कर भी जान बूझ कर अनजान बन कर पूछा- क्या मतलब?
काका बोले- सब्र कर, लग जाएगा सब पता.

हमारी ड्यूटी शाम 6 से सुबह 6 बजे तक होती थी. उस दिन हम दोनों खूब घूम घूम कर सारी सोसाइटी में बड़ी मुस्तैदी से ड्यूटी की. लोग आ जा रहे थे, 1-2 बजे तक तो लोग आते जाते ही रहते थे.
1 बजे के करीब रामू काका चले गए, मुझे ड्यूटी करते रहने के लिए कह कर.

करीब आधे घंटे बाद उनका फोन आया- अरे सुन, एक चक्कर लगा कर सीधा आ जा कमरे में!
मैंने सारी सोसाइटी का चक्कर लगाया और सीधा अपने कमरे में आ गया. जब कमरे के अंदर गया तो देखा वहाँ गीता पहले से ही बैठी थी. रामू काका और गीता दोनों देसी दारू की बोतल लिए बैठे थे, एक तरफ मुर्गा रखा हुआ था, गीता किसी के घर से लाई थी.
मैं भी उनके पास जा कर बैठ गया.

गीता ने अपने हाथ से एक पेग बना कर मुझे दिया. मैंने गटागट पी लिया. मुर्गा भी खाया. गीता की साड़ी का पल्लू नीचे गिरा हुआ था और उसके ब्लाउज़ से उसकी थोड़ी थोड़ी छातियाँ दिख रही थी.
पहले मैं उसको नहीं देख रहा था, मगर जब 2-3 गिलास दारू के अंदर चले गए तो गीता ही मुझे बड़ी सुंदर लगने लगी.

रामू काका ने मेरी नज़र भाँप ली और गीता से बोले- ए गीता, उठ और चल इधर आ कर मेरी जांघ पर बैठ!
गीता ने कामुकता से भरी बड़ी टेढ़ी मुस्कान दी और अपनी ही साड़ी में उलझती हुई रामू काका की जांघ पर बैठ गई.

रामू काका ने अपने गिलास से गीता को एक घूंट पिलाई और बोले- ये जो गीता है न जय, साली बहुत प्यासी है लंड की, अगर इसका बस चले न तो साली सारी रात चुदाई करवा कर भी इसका पेट न भरे.
गीता ने अपना गिलास उठाया और मेरी तरफ देखती हुई, उसमें से दारू पीने लगी.

फिर रामू काका बोले- और ये देख…
कह कर उन्होंने गीता की छाती को अपने हाथ में पकड़ा- क्या बोबा है साली का, नर्म और गर्म!
और दोनों हंसने लगे.

फिर रामू काका ने मेरा एक हाथ पकड़ा और खींच कर गीता की छाती पे रख दिया- ले तू भी दबा कर देख. मैंने हल्के से दबाया.
मुझे भी करंट सा लगा, तो मैंने छोड़ दिया.

रामू काका बोले- ये ऐसे नहीं करेगा, गीता जा, जाकर उसकी गोद में बैठ.
गीता रामू काका की गोद से उठी और मेरी तरफ बढ़ी, उसकी साड़ी का पल्लू नीचे फर्श पे लटक रहा था.
वो मेरे पास आई, हम दोनों एक दूसरे के चेहरे की तरफ देख रहे थे, वो मेरे पास झुकी और मेरी जांघ पर उसने आसन लगाया. पहले तो मैंने भी थोड़ा अचकचा कर बैठाया मगर बाद में मैंने उसकी कमर पकड़ कर उसको अपनी गोद में सेट कर लिया. उसके बदन की गंध मेरी साँसों में आ रही थी.

जब वो बैठ गई, तो रामू काका बोले- अबे भोंसड़ी के, कोई बच्ची नहीं बैठी है तेरी गोद में, एक जवान औरत बैठी है, उसे छू कर देख, अपने ये बड़े बड़े हाथ उठा और उसके बदन को दबा कर सहला कर देख!

मैं कुछ कहता इस से पहले ही गीता ने मेरा हाथ पकड़ा और अपने सीने पे रख लिया और अपने हाथ से मेरा हाथ दबाया, जिससे मेरे हाथ से उसका बोबा दाब गया.
‘देख चूतिये, तेरे से ज़्यादा गर्म तो ये है, थू है तेरी जवानी पे!’ रामू काका ने बोला.

मुझे बड़ा बुरा लगा, मैंने अपना हाथ गीता के ब्लाउज़ में ही डाल दिया और उसका बोबा पकड़ लिया. गीता बोली- लगता है लड़के को जोश आ गया है.
और उसने अपने ब्लाउज़ के एक एक करके सारे हुक खोल दिये. मेरी गोद में बैठे बैठे उसने अपना ब्लाउज़ उतार दिया.

मैंने अपना गिलास नीचे रखा और अपने दोनों हाथों से गीता के दोनों बोबे पकड़ लिए और उन्हें दबा दबा कर देखने लगा. गीता ने अपना सर मेरे कंधे पर रख दिया, मैंने उसकी गर्दन और उसके आस पास अपने होंठों से चूमा.
‘आह…’ गीता के मुँह से एक सिसकी सी निकली. रामू काका सामने बैठे सब देख रहे थे, मगर मुझे अब और कुछ नहीं दिख रहा था, मुझे सिर्फ गीता का बदन ही दिख रहा था. मैंने उसके बोबे और पेट पर अपने हाथ फिराते फिराते अपना एक हाथ उसकी साड़ी के अंदर डालना चाहा तो गीता बोली- एक मिनट रुको!

वो उठ कर खड़ी हुई, उसने अपनी साड़ी और पेटीकोट दोनों उतार दिये और मेरे सामने बिलकुल नंगी होकर खड़ी हो गई. दारू के नशे में वो मुझे किसी अप्सरा सी लगी, मैंने बैठे बैठे अपनी कमीज़ और बनियान उतार दी, बेल्ट खोली, बूट भी उतार दिये, और जब खड़ा होकर अपनी पैन्ट उतारी तो मेरी चड्डी में से उभरे हुये मेरे लंड को देख कर गीता बोली- ये क्या लिए घूम रहा है, चड्डी में हमें भी तो दिखा!
मैं उसे गोद में उठा कर बिस्तर पे ले गया और अपनी चड्डी उतार कर उसके ऊपर लेट गया.

मेरे उसके ऊपर लेटते ही वो एकदम से उठ बैठी- अरे रुक ये क्या है, ज़रा देखने तो दे!
वो उठी और मेरे लंड को हाथ में पकड़ कर देखने लगी, और फिर मेरी तरफ देख कर बोली- ये क्या है, इतना बड़ा?
मेरा पूरा तना हुआ लंड उसके हाथ में था.

उसकी बात सुन कर रामू काका भी हमारे पास आ गए और मेरे लंड को देख कर बोले- अरे वाह भाई, तू तो तीस मार खान निकला, इतना बड़ा लौड़ा तो पूरी सोसाइटी में किसी का नहीं होगा, अगर सोसाइटी में ये बात पता चल गई, तो तुझे तो एक से एक चूत मारने को मिलेगी.

मुझे भी बड़ी हैरानी हो रही थी, मैं तो समझता था कि मेरा लंड साधारण सा है, मगर गीता ने बताया- मैंने एक नहीं बहुत से लंड लिए हैं, मगर इतना लंबा, मोटा और बड़ा लंड आज तक नहीं देखा. मैंने कहा- तो फिर तुम लोगी या नहीं?
मुझे लगा अगर मेरा लंड ज़्यादा बड़ा है, तो कहीं ये लेने से मना न कर दे मगर गीता बोली- अरे, मैं तो तेरी गुलाम हो गई!
कह कर उसने मेरा लंड अपने मुँह में लिया और चूसने लगी, थोड़ा सा चूस कर वो लेट गई और बोली- चल आ जा!

मैं उसके ऊपर लेटा तो उसने खुद मेरा लंड अपनी चूत पर रखा और जब मेरा लंड उसकी चूत में घुसा तो वो बोली- ऐसा लग रहा है, जैसे आज पहली बार किसी का ले रही हूँ.
उसके बाद मैंने उसकी चुदाई शुरू की, वो मुझे बताती रही मैं वैसे वैसे करता रहा, रामू काका भी बीच बीच में अपनी सलाह देते रहे.
गीता ने सीधी लेट कर, घोड़ी बन कर, मेरे ऊपर चढ़ कर, खड़े हो कर, मेरी गोद में बैठ कर, पता नहीं कितने अजब अजब तरीके से मुझ से चुदवाया. मुझे उसके बारे में तो नहीं पता पर जब मैंने अपना पानी गिराया, तो मुझे बहुत मज़ा आया.

उस रात गीता ने मुझसे 3 बार चुदवाया. रामू काका सही कहते थे, उसकी आग तो शांत ही नहीं होती थी. चुदवाने के थोड़ी देर बाद वो फिर से चोदने को कहती. पहली बार तो मैंने अपना माल बाहर उसके पेट पर छुड़वाया था, मगर बाद की दो बार मैंने उसकी चूत के अंदर ही माल गिराया.

सुबह जब गीता गई, तो मुझसे कह कर गई- इसको तैयार रखना, मैं तुझे और भी बहुत सी चुदासी औरतों की दिलवाऊँगी, पर बस मुझे मत भूलना.

उसके बाद तो हर दूसरे दिन मैं गीता की चुदाई करता, अब वो रामू काका से नहीं चुदवाती थी, सिर्फ मुझसे!

दिनो दिन मैं भी शातिर होता जा रहा था, अब मैं जान गया था कि मेरा नौ इंच का मोटा काला लंड ही मेरी सब से बड़ी ताकत है, मैं सोसाइटी की हर औरत, हर लड़की को लाइन मारने लगा.
कोई मुझे देखती, कोई मुस्कुराती, कोई गाली भी दे जाती. मगर बात किसी से नहीं बनी.

मैंने एक दिन ये बात गीता से कही वो बोली- तू चिंता मत कर, मैं करती हूँ कुछ!
चंद दिनों बाद गीता मुझे एक फ्लैट में लेकर गई. मुझे अपनी एक मेम साहब से मिलवाया. दूध जैसी गोरी, बहुत ही सुंदर, किसी परी के जैसी प्यारी.
‘मैडम जी, यही है वो जय, जिसकी मैंने आपसे बात की थी.’

मैडम ने मुझे ऊपर से नीचे तक देखा, मुझे सोफ़े पर बैठाया और गीता से बोली- अरे, इसके लिए चाय तो बना लाओ.
गीता चाय बनाने को चली गई, तो मैंने शर्मिंदा सा चुपचाप सोफ़े पर बैठा रहा.

2-3 मिनट की चुप्पी के बाद मैडम जी बोली- गीता तुम्हारी बहुत तारीफ कर रही थी, कहती थी तुम जैसा दूसरा कोई भी नहीं, इस सोसाइटी में तो नहीं. ऐसा भी क्या खास है तुम में?
मैं क्या कहता, मैं शर्मा गया.
मैडम फिर बोली- देखो ऐसे शर्माने से काम नहीं चलेगा, अगर कुछ दुनिया से अलग चीज़ तुम्हारे पास है तो दिखाओ, वरना जा सकते हो.

मैं कुछ कहता इतने में गीता आ गई, चाय लेकर… वो बोली- अरे मैडम जी, ये तो बहुत शर्मीला है, मैं करती हूँ.

कह कर गीता मेरे पास आई, मुझे उठा कर खड़ा किया और मेरी पैन्ट की ज़िप खोल कर मेरा लंड बाहर निकाल कर मैडम को दिखाया.

अभी मेरा लंड खड़ा नहीं था, मगर फिर भी मैडम उसे देख कर उठ कर मेरे पास आ गई.
मैं बहुत शर्मा रहा था कि ये क्या हो रहा है मेरे साथ!

मगर मैडम ने मेरा लंड अपने हाथ में पकड़ा तो मेरा लंड तनाव खाने लगा, एक मिनट में ही मैडम के सुंदर गोरे हाथ लगते ही मेरा लंड तन गया.
मैडम ने मेरा पूरा लंड अपने हाथ में पकड़ा और बोली- सच में, ये तो अद्भुत है. इतना बड़ा और मजबूत तो मैंने आज तक नहीं देखा, क्या करते हो इसे इतना सख्त करने के लिए?
मैंने कहा- कुछ नहीं मैडम जी, बस थोड़ी बहुत कसरत कर लेता हूँ.

अभी मेरी बात पूरी भी नहीं हुई थी और मैडम ने मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया.

मैं बड़ा हैरान हुआ, मैंने गीता की और देखा वो सोफ़े पे बैठ कर चाय पीने लगी और मुझे आँख मार कर मुस्कुरा कर इशारा किया, जैसे कह रही हो, चिंता मत कर, मज़े कर!

मैंने अपनी बेल्ट और पैन्ट की हुक खोली और अपनी पैन्ट और चड्डी उतार कर नीचे गिरा दी. पूरी झांट मैंने कल ही साफ की थी, जिस वजह से मेरा लंड और भी बड़ा लग रहा था.

मैडम ने जब मेरा पूरा लंड देखा तो बोली- ऊ लाला, ये तो ज़बरदस्त है.
उसने मेरा लंड पकड़ा और मुझे अपने बेडरूम में ले गई. चलते चलते ही मैंने अपनी पैन्ट उतार दी, जो रास्ते में ही गिर गई.

अंदर जाकर उसने अपनी साड़ी ऊपर उठाई और बेड पे लेट गई. मैंने आगे बढ़ कर उसकी चड्डी उतार दी, गुलाबी रंग की चिकनी चूत. पहले तो मेरा दिल किया कि इतनी सुंदर छोटी सी चूत है, इसको तो चाट कर मज़ा लूँ.
मगर मैडम बोली- देखो मत, बस डाल दो!

मैंने अपना लंड पकड़ा, मैडम की खुली टाँगों के बीच में गया, अपने लंड की चमड़ी पीछे हटा कर कर उसका टोपा बाहर निकाला और मैडम की चूत पर रख दिया, जब अंदर को डाला, तो बेशक मैडम की चूत गीली थी, मगर मेरा लंड तो बिल्कुल सूखा था, तो वो थोड़ा अटक कर, रगड़ कर अंदर घुसा.
शायद मैडम को हल्का सा दर्द हुआ, मगर फिर भी उसने आनन्द भारी सिसकारी ली- इस्स… आह और डालो!

मैंने और थोड़ा सा ज़ोर लगाया और मेरा आधा लंड उसकी चूत में घुस गया.
‘और… डालो उम्म्ह… अहह… हय… याह… पूरा डालो!’ मैडम बोली.

गीता अपनी चाय का कप लिए दरवाजे में खड़ी ये सब देख रही थी, मैंने उसकी ओर देखा तो उसने फिर अपने हाथ से इशारा किया- ठोक!
मैंने और अपने लंड को अंदर ठेला, और तब तक अंदर घुसेड़ता गया, जब तक मेरा पूरा लंड उसकी चूत में घुस न गया.

जब पूरा घुस गया, तो मैडम ने उठ कर देखा, मेरी झांट उसकी झांट को चूम रही थी. उसने मुझसे पूछा- पूरा डल गया क्या?
मैंने भी नीचे देख कर कहा- हाँ, पूरा गया.
वो बड़ी निश्चिंत सी होकर बेड पे लेट गई- अब जितनी जान है तेरे मे, पूरी जान लगा दे, जब तक मैं न कहूँ, तू रुकना मत और झड़ना मत.

मैंने उसकी चुदाई शुरू की. मैं ये सोच रहा था कि शहर की औरतें कैसी होती हैं. क्या ज़्यादा पैसा आदमी को चरित्रहीन बना देता है. पर गीता के पास को ज़्यादा पैसा भी नहीं है, क्या वो इन लोगों की सोहबत में रह कर ऐसी हो गई है.

मैंने मैडम की दोनों टाँगें अपने कंधों पे रख ली. गीता अपना काम करने चली गई. मैं अपना काम करता रहा. मगर मैंने ये ख्याल रखा कि मैं जल्दी न झड़ूँ.

मैडम जब तड़पती थी, तो मुझे पता लग जाता था कि उसका पानी छूट रहा है. मगर मैं यह देख कर हैरान था कि मैडम में आग कितनी थी, वो 2 या 3 मिनट में ही पानी गिरा देती थी, मैंने खुद गिना, उसने 5 बार पानी गिराया.
वो ज़्यादा तड़पती नहीं थी, न ही ज़्यादा शोर मचाती थी, बस थोड़ा सा खुद नीचे से अपनी कमर उचकाती और एक हुंकार सी भर के अकड़ जाती थी.

मैंने उसे 20 मिनट तक चोदा, तब मैडम बोली- अब बस कर, अब और नहीं कर सकती.
मैंने कहा- तो मैं अपना पानी कहाँ छुड़वाऊँ?
वो बोली- तेरे सामने लेटी हूँ, जहां मर्ज़ी गिरा दे.
मैंने कहा- आपको मुँह में लेने कोई दिक्कत तो नहीं?
वो बोली- नहीं, मगर पियूँगी नहीं, मुँह में लेकर वाश बेसिन में थूक दूँगी.
मैंने कहा- ठीक है, फिर चूस कर ही मेरा पानी निकाल दो.

मैंने उसकी चूत से अपना लंड निकाला और बेड पे लेट गया.
वो उठी और मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी. मैंने उसका ब्लाउज़ ऊपर उठा कर उसके दोनों चूचे बाहर निकाले और कभी दबाया तो कभी चूसा, मगर उसने पूरे मज़े और जोश के साथ मेरा लंड चूसा.
और जब मेरा माल निकला तो उसने सारा अपने मुँह में लिया, माल गिरा भी बहुत, और शायद थोड़ा बहुत उसके गले में भी उतर गया, मगर उसने मेरा लंड तब तक अपने मुँह से नहीं निकाला जब तक मैं खाली न हो गया.
उसका मुँह पूरा फूला हुआ था, वो उठी और बाथरूम में चली गई.

मैं लेटा रहा. जब वो खुद को फिर से तैयार कर के बाहर आई, मैं वैसे ही बेड पे लेटा था, मुझे देख कर वो बोली- अरे तुम्हारा तो अभी भी ढीला नहीं पड़ा है. अभी दिल नहीं भरा क्या?
मैंने कहा- आप जैसी शानदार औरत से दिल भर ही नहीं सकता.
वो बोली- पर मेरी तसल्ली हो गई है, अब तुम जाओ, जिस दिन फिर ज़रूरत पड़ी, मैं तुम्हें फिर से बुला लूँगी.

मैंने उठ कर अपने कपड़े पहने और अपने क्वाटर में वापिस आ गया.

आते ही रामू काका ने पूछा- कैसी रही रीमा मेम साहब?
मैंने पूछा- आपको पता था?
वो बोले- अरे मुझे सब का पता है, बड़ी चुदासी है मादरचोद. अभी देखना और कितनी औरतों की दिलवाएगी तुझे. इसकी लड़की तो इसकी भी माँ हैं, साली सोसाइटी के कंपाउंड में, कार में, लिफ्ट में, पता नहीं कहाँ कहाँ चुदवाती है. रोज़ नए लड़के के साथ आती है.

मैंने खुश हो कर पूछा- सच क्या ताऊ?
वो बोले- बेटा, मेरा 8 साल का तजुरबा है, इस सोसाइटी का. एक से बड़ी एक छिनाल रहती है यहाँ, ऊपर से बड़े नेक, शरीफ और अंदर से एक नंबर की रंडियाँ साली!

मैंने पूछा- इनके साहब लोगों को नहीं पता क्या?
रामू काका बोले- क्यों नहीं पता, वहाँ भी सेटिंग है, कोई एक दूसरे को नहीं पूछता. रीमा मेम साहब को क्या पता नहीं, गीता के पेट में किसका बच्चा था, जो उसने पैसे देकर सफाई करवाई है. सब जानते हैं, एक दूसरे के बारे में, पर मुँह पर कोई नहीं बोलता. तू अपने मज़े कर, मैं अपने मज़े करूंगा.

मैं हैरान हुआ, रामू काका की बातें सुन रहा था.



loading...

और कहानिया

loading...
One Comment
  1. SATISH KULKARNI
    November 17, 2017 |

Online porn video at mobile phone


bheed me ladki ke sath gangrap ki sexy story in hindiचाची गांड की चुदाईsasu ma bahu sex kahanikamukta nayi kahanibharatpur ki ldki ka full sex cudae mobe hddidi ne mom ko chudwayasexi kshsnistory hindi me pornचाची ने अपने भतीजे को लेकर की चुदाईमाँ सं दासी क्सनक्सक्स ऑडियो अञ्जनी मायMastram ki mast kahaniyaNew xxx story लिखितमुशलिम भाभी देवर का सुहागरात सटोरीchoti beti ko bra panty ko change krte hue dekha or chod diya in sex storyक्सक्सक्स विद्वा बॉस की बीवी चुड़ै स्टोरीtrain me grup xxx kahanixnx anthrwasana sex kahanekesa ye pyr h lesbian hindi love storyjabardasti se mom ki chudai kibhabi ne kaha apni didi ki gaand marogeचुदाई घर मे महीलाMeri bur budde ne chodakamukta dot comNewle bhabhi chudai gangbang jabardasti kahanisxye jeja sale ka blatkar antr vasna khane hendi free dyse hot part 5padosan ka balatkarsafar ki jabardasti ki kahaniबिधवा दीदी को नोकर और साधु ने चोदाताऊ ने मम्मी को काला लंड दियाजबरजथी किसी मदद से xxx stories antarvasna.comदिवाली के दिन भाभी की सील पैक चुदाई स्टोरीpdosn se esxKamukta xxx hindi storynahtee hui mom batrum onlinesexystorymamihindipraginet ghirlxxxपति ने सहेली को चोद लियाताऊ की लडकी ने सोते मेँ चुदबाया उसकी कहनियाँसेकसी कहानी जबरजती की चाची की हिदी मे 2018 comkahaneesexjija ka mota land or meri kunwari chut kamukta.comchoti behan ki choodai njdian xxx.comihede indeasex xxx new video hdsaale kamine harami sasur ne chod daaala sex storiesचुदाइ की लिखित कहानीkamlila.com18 sal ki ladki ki seal fad di ladki chila rhi h bhaut tejxxx gandi kahani rape बस मे जबरदतीsex videochudai ki hindi kahania chodan www.commaa ko choda kichan me chaudai kahaniyamaa sharbhi sex storiesदेशी हरियाणी कि चुतसेकस कथा चिञsex khani bhai bhean kiबाराबंकी इंडियन दिहाती विडियो Xxxxxxx maa beta kahani hindi sex utopkamuktakamuktasexstory.comबस अब बहार निकालो मेरी टूट गयी हिंदी सेक्स कहानीगर्म khni nyi trh की bivi ka kutta घर मीटर priwar ke smne हिंदी मीटरपूनम की चुत चुदाईआंटी बलात्कार कहानीbahan bai ki sex cudai suksex antarvasna and kamukta ki hindi sex storisasu maa bani meri dulhan sex storiesxnxx biradhrs sistar gandhMuslim choir me Hindu lund chudai kahaniyanटिटी ने 6 लडकीयाँ की चुदाई काहानी xxx khaniihede indeasex xxx new video hdsax se tadapte ladki ke sath sex xvideokamukta.comकुवारी बहन की चुदाई की कहानीland dikhakar sex ke liye raji sex vsafar ki jabardasti ki kahanisuhagrat xxxstoris.com for readingGand mari bus me thuk lagake mom kisexy cudai kahani antercsnajabra.dsti.coda.cudi.ki.kahniy.hindiantarvasnaAunti ko choda je bhar k sexy storyma v bhanji ki chut fadi hindi sex storiesantervasanasexstory.com hindisexi chut hindi storymaa ko choda kichan me seduk karke sex hindi storibadi baji ka nada kholkar bur fad diwww.kamukta.dot comxxxn com hip new luajलड़की झड़ते तक चोदना online videolatest hindi sexstorySexy hind jhatake krna pronWww.gay suvagrat kamukta.cosex kahaniगुजरातीलङकी सेकस विडीओXXX KHANE HINDEबुर लंड नौकरkamuktahindisexhot xxx kahani